सुन्दरकाण्ड रामायण सम्पूर्ण अध्याय - Ramanand Sagar Ramayan Hindi
श्री वाल्मीकि (Valmiki) कृत रामायण में सुन्दरकाण्ड अतिसुन्दर भाग है, जिसमे श्री हनुमान जी द्वारा लंका प्रस्थान से लेकर लंका वापसी तक का समस्त घटनाक्रम का वर्णन मिलता है।
रामायण सुन्दरकाण्ड का पाठ कैसे करें - How To Read SunderKand
सुन्दरकाण्ड का पाठ करने से या श्रवण करने से जीवन में अनेको प्रकार के लाभ है। वैसे तो इसका पाठ आप कभी भी कर सकते है किन्तु आप पाठ पूर्व निम्न बातो का ध्यान रखेंगे तो पाठ करने में सहायता मिलेगी।
१. अगर आप सुन्दरकाण्ड का पाठ अकेले करते है तो आप सुबह सुबह ब्रम्ह मुहर्त के समय ४. बजे से ६. बजे के बिच करे अत्यंत सुखदायी होगा।
२. सुंदरकांड का पाठ ग्रुप में भी किया जा सकता है इसके लिए आप शाम ७. बजे के बाद का रखे जिससे सभी सदस्य शामिल हो सके एवं सबको सुभ आशीष मिल सके।
३. सुन्दरकाण्ड का पाठ मुख्य रूप से मंगलवार शनिवार पूर्णिमा आमवस्या के दिन अवस्य करे।
४. सुन्दरकाण्ड का पाठ करने के पूर्व आप कुछ बातो का अवस्य ध्यान रखे जैसे साफ सफाई , समर्पण , अच्छा विचार , मन में भक्ति की भावना , आप कोई भी बहरी विचार मन में न लाये।
५. पाठ प्रारम्भ करने के पहले स्नान अवस्य करे एवं साफ कपडे पहने हो सके तो पिले या भगवा रंग के कपडे पहने।
६. सुन्दरकाण्ड का पाठ से पहले आप न खाये या फिर मगलवार शनिवार को उपवास रख सकते है और उस दिन पाठ करे।
७. पाठ करने के पूर्व प्रभु का ध्यान करे एवं आरम्भ करे जब तक पाठ समाप्त न हो आप जाप करते रहे। पाठ समाप्ति के बाद प्रणाम करके उठ जाए और दैनिक क्रिया कर सकते है।
यहाँ निचे आपको सुंदरकांड रामायण पाठ में आने वाले सभी घटनाक्रमों को अलग अलग दिया जा रहा है जिससे आपको पढ़ने और समझने में आसानी होगी साथ में हिंदी अनुवाद ( Meaning) भी दिया जा रहा है जिससे आप श्लोकों का अर्थ समझ सके।
- मंगलाचरण
- हनुमान्जी का लंका को प्रस्थान, सुरसा से भेंट, छाया पकड़ने वाली राक्षसी का वध
- लंका वर्णन, लंकिनी वध, लंका में प्रवेश
- हनुमान्-विभीषण संवाद
- हनुमान्जी का अशोक वाटिका में सीताजी को देखकर दुःखी होना और रावण का सीताजी को भय दिखलाना
- श्री सीता-त्रिजटा संवाद
- श्री सीता-हनुमान् संवाद
- हनुमान्जी द्वारा अशोक वाटिका विध्वंस, अक्षय कुमार वध और मेघनाद का हनुमान्जी को नागपाश में बाँधकर सभा में ले जाना
- हनुमान्-रावण संवाद
- लंकादहन
- लंका जलाने के बाद हनुमान्जी का सीताजी से विदा माँगना और चूड़ामणि पाना
- समुद्र के इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन, श्री राम-हनुमान् संवाद
- श्री रामजी का वानरों की सेना के साथ चलकर समुद्र तट पर पहुँचना
- मंदोदरी-रावण संवाद
- रावण को विभीषण का समझाना और विभीषण का अपमान
- विभीषण का भगवान् श्री रामजी की शरण के लिए प्रस्थान और शरण प्राप्ति
- समुद्र पार करने के लिए विचार, रावणदूत शुक का आना और लक्ष्मणजी के पत्र को लेकर लौटना
- दूत का रावण को समझाना और लक्ष्मणजी का पत्र देना
- समुद्र पर श्री रामजी का क्रोध और समुद्र की विनती, श्री राम गुणगान की महिमा

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